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रामदेव बाबा Vs अण्णा हजारे = भगवा वस्त्र Vs गाँधीटोपी छाप सेकुलरिज़्म (भाग-2)

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(भाग-1 से जारी…http://blog.sureshchiplunkar.com/2011/04/jan-lokpal-bill-national-advisory.html) पेश है दूसरा और अन्तिम भाग…

यह कहना मुश्किल है कि “झोलाछाप” सेकुलर NGO इंडस्ट्री के इस खेल में अण्णा हजारे खुद सीधे तौर पर शामिल हैं या नहीं, परन्तु यह बात पक्की है कि उनके कंधे पर बन्दूक रखकर उनकी “छवि” का “उपयोग” अवश्य किया गया है… चूंकि अण्णा सीधे-सादे हैं, इसलिये वह इस खेल से अंजान रहे और अनशन समाप्त होते ही उन्होंने नरेन्द्र मोदी और नीतीश कुमार की तारीफ़ कर डाली… बस फ़िर क्या था? अण्णा की “भजन मंडली” (मल्लिका साराभाई, संदीप पाण्डे, अरुणा रॉय और हर्ष मंदर जैसे स्वघोषित सेकुलरों) में से अधिकांश को मिर्गी के दौरे पड़ने लगे… उन्हें अपना खेल बिगड़ता नज़र आने लगा, तो फ़िर लीपापोती करके जैसे-तैसे मामले को रफ़ा-दफ़ा किया गया। यह बात तय जानिये, कि यह NGO इंडस्ट्री वाला शक्तिशाली गुट, समय आने पर एवं उसका “मिशन” पूरा होने पर, अण्णा हजारे को दूध में गिरी मक्खी के समान बाहर निकाल फ़ेंकेगा…। फ़िलहाल तो अण्णा हजारे का “उपयोग” करके NGOवादियों ने अपने “धुरंधरों” की केन्द्रीय मंच पर जोरदार उपस्थिति सुनिश्चित कर ली है, ताकि भविष्य में हल्का-पतला, या जैसा भी लोकपाल बिल बने तो चयन समिति में “अण्णा आंदोलन” के चमकते सितारों(?) को भरा जा सके।

जन-लोकपाल बिल तो जब पास होगा तब होगा, लेकिन भूषण साहब ने इसमें जो प्रावधान रखे हैं उससे तो लगता है कि जन-लोकपाल एक “सर्वशक्तिमान” सुपर-पावर किस्म का सत्ता-केन्द्र होगा, क्योंकि यह न्यायिक और पुलिस अधिकारों से लैस होगा, सीबीआई इसके अधीन होगी, यह समन भी जारी कर सकेगा, गिरफ़्तार भी कर सकेगा, केस भी चला सकेगा, मक्कार सरकारी मशीनरी और न्यायालयों की सुस्त गति के बावजूद सिर्फ़ दो साल में आरोपित व्यक्ति को सजा भी दिलवा सकेगा… ऐसा जबरदस्त ताकत वाला संस्थान कैसे बनेगा और कौन सा राजनैतिक दल बनने देगा, यही सबसे बड़ा पेंच है। देखते हैं यमुना में पानी का बहाव अगले दो महीने में कैसा रहता है…

जन-लोकपाल बिल पर होने वाले मंथन (बल्कि खींचतान कहिये) में संसदीय परम्परा का प्रमुख अंग यानी “प्रतिपक्ष” कहीं है ही नहीं। कुल जमा दस लोग (पाँच-पाँच प्रतिनिधि) ही देश के 120 करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व करेंगे… इसमें से भी विपक्ष गायब है यानी लगभग 50 करोड़ जनता की रायशुमारी तो अपने-आप बाहर हो गई… पाँच सत्ताधारी सदस्य हैं यानी बचे हुए 70 करोड़ में से हम इन्हें 35 करोड़ का प्रतिनिधि मान लेते हैं… अब बचे 35 करोड़, जिनका प्रतिनिधित्व पाँच सदस्यों वाली “सिविल सोसायटी” करेगी (लगभग एक सदस्य के हिस्से आई 7 करोड़ जनता, उसमें भी भूषण परिवार के दो सदस्य हैं यानी हुए 14 करोड़ जनता)। अब बताईये भला, इतने जबरदस्त “सभ्य समाज” (सिविल सोसायटी) के होते हुए, हम जैसे नालायक तो “असभ्य समाज” (अन-सिविल सोसायटी) ही माने जाएंगे ना? हम जैसे, अर्थात जो लोग नरेन्द्र मोदी, सुब्रह्मण्यम स्वामी, बाबा रामदेव, गोविन्दाचार्य, टीएन शेषन इत्यादि को ड्राफ़्टिंग समिति में शामिल करने की माँग करते हैं वे “अन-सिविल” हैं…

जन-लोकपाल की नियुक्ति करने वाली समिति बनाने का प्रस्ताव भी मजेदार है-

1) लोकसभा के दोनों सदनों के अध्यक्ष रहेंगे (इनकी नियुक्ति सोनिया गाँधी ने की है)

2) सुप्रीम कोर्ट के दो वरिष्ठ जज होंगे (बालाकृष्णन और दिनाकरण नामक “ईसाई” जजों के उदाहरण हमारे सामने हैं, इनकी नियुक्ति भी कांग्रेस, यानी प्रकारान्तर से सोनिया ने ही की थी)

3) हाईकोर्ट के दो वरिष्ठतम जज भी होंगे… (–Ditto–)

4) मानव-अधिकार आयोग के अध्यक्ष होंगे (यानी सोनिया गाँधी का ही आदमी)

5) भारतीय मूल के दो नोबल पुरस्कार विजेता (अव्वल तो हैं ही कितने? और भारत में निवास तो करते नहीं, फ़िर यहाँ की नीतियाँ तय करने वाले ये कौन होते हैं?)

6) अन्तिम दो मैगसेसे पुरस्कार विजेता… (अन्तिम दो??)

7) भारत के महालेखाकार एवं नियंत्रक (CAG)

8) मुख्य चुनाव आयुक्त (यह भी मैडम की मेहरबानी से ही मिलने वाला पद है)

9) भारत रत्न से नवाज़े गये व्यक्ति (इनकी भी कोई गारण्टी नहीं कि यह सत्तापक्ष के प्रति झुकाव न रखते हों)

इसलिये जो महानुभाव यह सोचते हों, कि संसद है, मंत्रिमण्डल है, प्रधानमंत्री है, NAC है… वह वाकई बहुत भोले हैं… ये लोग कुछ भी नहीं हैं, इनकी कोई औकात नहीं है…। अन्तिम इच्छा सिर्फ़ और सिर्फ़ सोनिया गाँधी की चलती है और चलेगी…। 2004 की UPA की नियुक्तियों पर ही एक निगाह डाल लीजिये –

1) सोनिया गाँधी ने ही नवीन चावला को चुनाव आयुक्त बनाया

2) सोनिया गाँधी ने ही महालेखाकार की नियुक्ति की

3) सोनिया गाँधी की मर्जी से ही बालाकृष्णन सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बने थे

4) सोनिया गाँधी ने ही सीबीआई प्रमुख की नियुक्ति की…

5) सोनिया गाँधी की वजह से ही सीवीसी थॉमस नियुक्त भी हुए और सुप्रीम कोर्ट की लताड़े के बावजूद इतने दिनों अड़े रहे…

6) कौन नहीं जानता कि मनमोहन सिंह, और प्रतिभा पाटिल की “नियुक्ति” (जी हाँ, नियुक्ति) भी सोनिया गाँधी की “पसन्द” से ही हुई…

अब सोचिये, जन-लोकपाल की नियुक्ति समिति के “10 माननीयों” में से यदि 6 लोग सोनिया के “खासुलखास” हों, तो जन-लोकपाल का क्या मतलब रह जाएगा? नोबल पुरस्कार विजेता और मेगसेसे पुरस्कार विजेताओं की शर्त का तो कोई औचित्य ही नहीं बनता? ये कहाँ लिखा है कि इन पुरस्कारों से लैस व्यक्ति “ईमानदार” ही होता है? इस बात की क्या गारण्टी है कि ऐसे “बाहरी” तत्व अपने-अपने NGOs को मिलने वाले विदेशी चन्दे और विदेशी आकाओं को खुश करने के लिये भारत की नीतियों में “खामख्वाह का हस्तक्षेप” नहीं करेंगे? सब जानते हैं कि इन पुरस्कारों मे परदे के पीछे चलने वाली “लॉबीइंग” और चयन किये जाने वाले व्यक्ति की प्रक्रिया के पीछे गहरे राजनैतिक निहितार्थ होते हैं।

ज़रा सोचिये, एक माह पहले क्या स्थिति थी? बाबा रामदेव देश भर में घूम-घूमकर कांग्रेस, सोनिया और भ्रष्टाचार के खिलाफ़ माहौल तैयार कर रहे थे, सभाएं ले रहे थे, भारत स्वाभिमान नामक “संगठन” बनाकर, मजबूती से राजनैतिक अखाड़े में संविधान के तहत चुनाव लड़ने के लिये कमर कस रहे थे, मीडिया लगातार 2G और कलमाडी की खबरें दिखा रहा था, देश में कांग्रेस के खिलाफ़ जोरदार माहौल तैयार हो रहा था, जिसका नेतृत्व एक भगवा वस्त्रधारी कर रहा था, आगे चलकर इस अभियान में नरेन्द्र मोदी और संघ का भी जुड़ना अवश्यंभावी था…। और अब पिछले 15-20 दिनों में माहौल ने कैसी पलटी खाई है… नेतृत्व और मीडिया कवरेज अचानक एक गाँधी टोपीधारी व्यक्ति के पास चला गया है, उसे घेरे हुए जो “टोली” काम कर रही है, वह धुर “हिन्दुत्व विरोधी” एवं “नरेन्द्र मोदी से घृणा करने वालों” से भरी हुई है… इनके पास न तो कोई संगठन है और न ही राजनैतिक बदलाव ला सकने की क्षमता… कांग्रेस तथा सोनिया को और क्या चाहिये?? इससे मुफ़ीद स्थिति और क्या होगी कि सारा फ़ोकस कांग्रेस-सोनिया-भ्रष्टाचार से हटकर जन-लोकपाल पर केन्द्रित हो गया? तथा नेतृत्व ऐसे व्यक्ति के हाथ चला गया, जो “सत्ता एवं सत्ता की राजनीति में” कोई बड़ा बदलाव करने की स्थिति में है ही नहीं।

मुख्य बात तो यह है कि जनता को क्या चाहिये- 1) एक “फ़र्जी” और “कठपुतली” टाइप का जन-लोकपाल देश के अधिक हित में है, जिसके लिये अण्णा मण्डली काम कर रही है… अथवा 2) कांग्रेस जैसी पार्टी को कम से कम 10-15 साल के लिये सत्ता से बेदखल कर देना, जिसके लिये नरेन्द्र मोदी, रामदेव, सुब्रह्मण्यम स्वामी, गोविन्दाचार्य जैसे लोग काम कर रहे हैं? कम से कम मैं तो दूसरा विकल्प चुनना ही पसन्द करूंगा…

अब अण्णा के आंदोलन के बाद क्या स्थिति बन गई है… प्रचार की मुख्यधारा में “सेकुलरों”(?) का बोलबाला हो गया है, एक से बढ़कर एक “हिन्दुत्व विरोधी” और “नरेन्द्र मोदी गरियाओ अभियान” के अगुआ लोग छाए हुए हैं, यही लोग जन-लोकपाल भी बनवाएंगे और नीतियों को भी प्रभावित करेंगे। बाकी सभी को “अनसिविलाइज़्ड” साबित करके चुनिंदा लोग ही स्वयंभू “सिविल” बन बैठे हैं… यह नहीं चलेगा…। जब उस “गैंग” के लोगों को नरेन्द्र मोदी की तारीफ़ तक से परेशानी है, तो हमें भी “उस NGOवादी गैंग” पर विश्वास क्यों करना चाहिए? जब “वे लोग” नरेन्द्र मोदी के प्रशासन और विकास की अनदेखी करके… रामदेव बाबा के प्रयासों पर पानी फ़ेरकर… रातोंरात मीडिया के चहेते और नीति निर्धारण में सर्वेसर्वा बन बैठे हैं, तो हम भी इतने “गये-बीते” तो नहीं हैं, कि हमें इसके पीछे चलने वाली साजिश नज़र न आये…।

मजे की बात तो यह है कि अण्णा हजारे को घेरे बैठी “सेकुलर चौकड़ी” कुछ दिन भी इंतज़ार न कर सकी… “सेकुलरिज़्म की गंदी बदबू” फ़ैलाने की दिशा में पहला कदम भी ताबड़तोड़ उठा लिया। हर्ष मन्दर और मल्लिका साराभाई सहित दिग्गी राजा ने अण्णा के मंच पर “भारत माता” के चित्र को संघ का आईकॉन बता दिया था, तो JNU छाप मोमबत्ती ब्रिगेड ने अब यह तय किया है कि अण्णा के मंच पर भारत माता का नहीं बल्कि तिरंगे का चित्र होगा, क्योंकि भारत माता का चित्र “साम्प्रदायिक” है। शक तो पहले दिन से ही हो रहा था कि कुनैन की गोली खाये हुए जैसा मुँह बनाकर अग्निवेश, “भारत माता की जय” और वन्देमातरम के नारे कैसे लगा रहे हैं। परन्तु वह सिर्फ़ “तात्कालिक नौटंकी” थी, भारत माता का चित्र हटाने का फ़ैसला लेकर इस सेकुलर जमात ने “भविष्य में आने वाले जन-लोकपाल बिल का रंग” पहले ही दिखा दिये हैं। “सेकुलर चौकड़ी” ने यह फ़ैसला अण्णा को “बहला-फ़ुसला” कर लिया है या बाले-बाले ही लिया है, यह तो वे ही जानें, लेकिन भारत माता का चित्र भी साम्प्रदायिक हो सकता है, इसे सुनकर बंकिमचन्द्र जहाँ भी होंगे उनकी आत्मा निश्चित ही दुखेगी…

उल्लेखनीय है कि आंदोलन के शुरुआत में मंच पर भारत माता का जो चित्र लगाया जाने वाला था, वह भगवा ध्वज थामे, “अखण्ड भारत” के चित्र के साथ, शेर की सवारी करती हुई भारत माता का था (यह चित्र राष्ट्रवादी एवं संघ कार्यकर्ता अपने कार्यक्रमों में उपयोग करते हैं)। “सेकुलर दिखने के लालच” के चलते, इस चित्र में फ़ेरबदल करके अण्णा हजारे ने भारत माता के हाथों में तिरंगा थमाया और शेर भी हटा दिया, तथा अखण्ड भारत की जगह वर्तमान भारत का चित्र लगा दिया…। चलो यहाँ तक भी ठीक था, क्योंकि भ्रष्टाचार से लड़ाई के नाम पर, “मॉडर्न गाँधी” के नाम पर, और सबसे बड़ी बात कि जन-लोकपाल बिल के नाम पर “सेकुलरिज़्म” का यह प्रहार सहा भी जा सकता था। परन्तु भारत माता का यह चित्र भी “सेकुलरिज़्म के गंदे कीड़ों” को अच्छा नहीं लग रहा था, सो उसे भी साम्प्रदायिक बताकर हटा दिया गया और अब भविष्य में अण्णा के सभी कार्यक्रमों में मंच पर बैकग्राउण्ड में सिर्फ़ तिरंगा ही दिखाई देगा, भारत माता को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है (शायद “सिविल सोसायटी”, देशभक्ति जैसे “आउटडेटेड अनसिविलाइज़्ड सिम्बॉल” को बर्दाश्त नहीं कर पाई होगी…)।

दरअसल हमारा देश एक विशिष्ट प्रकार के एड्स से ग्रसित है, भारतीय संस्कृति, हिन्दुत्व एवं सनातन धर्म से जुड़े किसी भी चिन्ह, किसी भी कृति से कांग्रेस-पोषित एवं मिशनरी द्वारा ब्रेन-वॉश किये जा चुके “सेकुलर”(?) परेशान हो जाते हैं। इसी “सेकुलर गैंग” द्वारा पाठ्यपुस्तकों में “ग” से गणेश की जगह “ग” से “गधा” करवाया गया, दूरदर्शन के लोगो से “सत्यम शिवम सुन्दरम” हटवाया गया, केन्द्रीय विद्यालय के प्रतीक चिन्ह से “कमल” हटवाया गया, वन्देमातरम को जमकर गरियाया जाता है, स्कूलों में सरस्वती वन्दना भी उन्हें “साम्प्रदायिक” लगती है… इत्यादि। ऐसे ही “सेकुलर एड्सग्रसित” मानसिक विक्षिप्तों ने अब अण्णा को फ़ुसलाकर, भारत माता के चित्र को भी हटवा दिया है… और फ़िर भी ये चाहते हैं कि हम बाबा रामदेव और नरेन्द्र मोदी की बात क्यों करते हैं, भ्रष्टाचार को हटाने के “विशाल लक्ष्य”(?) में उनका साथ दें…।

भूषण पिता-पुत्र पर जो जमीन-पैसा इत्यादि के आरोप लग रहे हैं, थोड़ी देर के लिये उसे यदि दरकिनार भी कर दिया जाए (कि बड़ा वकील है तो भ्रष्ट तो होगा ही), तब भी ये हकीकत बदलने वाली नहीं है, कि बड़े भूषण ने कश्मीर पर अरुंधती के बयान का पुरज़ोर समर्थन किया था… साथ ही 13 फ़रवरी 2009 को छोटे भूषण तथा संदीप पाण्डे ने NIA द्वारा सघन जाँच किये जा रहे पापुलर फ़्रण्ट ऑफ़ इंडिया (PFI) नामक आतंकवादी संगठन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भी भाग लिया था, ज़ाहिर है कि अण्णा के चारों ओर “मानवाधिकार और सेकुलरिज़्म के चैम्पियनों”(?) की भीड़ लगी हुई है। इसीलिये प्रेस वार्ता के दौरान अन्ना के कान में केजरीवाल फ़ुसफ़ुसाते हैं और अण्णा बयान जारी करते हैं कि “गुजरात के दंगों के लिये मोदी को माफ़ नहीं किया जा सकता…”, परन्तु अण्णा से यह कौन पूछेगा, कि दिल्ली में 3000 सिखों को मारने वाली कांग्रेस के प्रति आपका क्या रुख है? असल में “सेकुलरिज़्म” हमेशा चुनिंदा ही होता है, और अण्णा तो वैसे भी “दूसरों” के कहे पर चल रहे हैं, वरना लोकपाल बिल की जगह अण्णा, 2G घोटाले की तेजी से जाँच, स्विस बैंकों से पैसा वापस लाने, कलमाडी को जेल भेजने जैसी माँगों को लेकर अनशन पर बैठते?

“उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे” की तर्ज पर, कांग्रेस और मीडिया की मिलीभगत द्वारा भ्रम फ़ैलाने का एक और प्रयास यह भी है कि अण्णा हजारे, संघ और भाजपा के करीबी हैं। अण्णा हजारे का तो पता नहीं, लेकिन उन्हें जो लोग “घेरे” हुए हैं उनके बारे में तो निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि वे संघ-भाजपा के लोग नहीं हैं। अण्णा द्वारा मोदी की तारीफ़ पर भड़कीं मल्लिका साराभाई हों या अण्णा के मंच पर स्थापित “भारत माता के चित्र” पर आपत्ति जताने वाले हर्ष मंदर हों, अरुंधती रॉय के कश्मीर बयान की तारीफ़ करने वाले “बड़े” भूषण हों या माओवादियों के दलाल स्वामी अग्निवेश हों… (महेश भट्ट, तीस्ता जावेद सीतलवाड और शबाना आज़मी भी पीछे-पीछे आते ही होंगे…)। जरा सोचिये, ऐसे विचारों वाले लोग खुद को “सिविल सोसायटी” कह रहे हैं…।

फ़िलहाल सिर्फ़ इतना ही…… क्योंकि कहा जा रहा है, कि जन-लोकपाल बिल बनाने में “अड़ंगे” मत लगाईये, अण्णा की टाँग मत खींचिये, उन्हें कमजोर मत कीजिये… चलिये मान लेते हैं। अब इस सम्बन्ध में विस्तार से 15 अगस्त के बाद ही कुछ लिखेंगे… तब तक आप तेल देखिये और तेल की धार देखिये… आये दिन बदलते-बिगड़ते बयानों को देखिये, अण्णा हजारे द्वारा प्रस्तावित जन-लोकपाल बिल संसद नामक गुफ़ाओं-कंदराओं से बाहर निकलकर “किस रूप” में सामने आता है, सब देखते जाईये…

दिल को खुश करने के लिये मान लेते हैं, कि जैसा बिल “जनता चाहती है”(?) वैसा बन भी गया, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि लोकपाल नियुक्ति हेतु चयन समिति में बैठने वाले लोग कौन-कौन होंगे? असली “राजनैतिक कांग्रेसी खेल” तो उसके बाद ही होगा… और देखियेगा, कि उस समय सब के सब मुँह टापते रह जाएंगे, कि “अरे… यह लोकपाल बाबू भी सोनिया गाँधी के ही चमचे निकले…!!!” तब तक चिड़िया खेत चुग चुकी होगी…।

इसलिये हे अण्णा हजारे, जन-लोकपाल बिल हेतु हमारी ओर से आपको अनंत शुभकामनाएं, परन्तु जिस प्रकार आपकी “सेकुलर मण्डली” का “सो कॉल्ड” बड़ा लक्ष्य, सिर्फ़ जन-लोकपाल बिल है, उसी तरह हम जैसे “अनसिविलाइज़्ड आम आदमी की सोसायटी” का भी एक लक्ष्य है, देश में सनातन धर्म की विजय पताका पुनः फ़हराना, सेकुलर कीट-पतंगों एवं भारतीय संस्कृति के विरोधियों को परास्त करना… रामदेव बाबा- नरेन्द्र मोदी सरीखे लोगों को उच्चतम स्तर पर ले जाना, और इन से भी अधिक महत्वपूर्ण लक्ष्य है, कांग्रेस जैसी पार्टी को नेस्तनाबूद करना…। अण्णा जी, भले ही आप “बुरी सेकुलर संगत” में पड़कर राह भटक गये हों, हम नहीं भटके हैं… और न भटकेंगे…

(समाप्त)

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7 प्रतिक्रिया

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mukesh jai के द्वारा
November 5, 2011

हिन्दू संगठनो ने जन्तर मन्तर पर अन्ना हजारे के विरोध में प्रदर्शन किया धर्मरक्षक श्री दारा सेना के अध्यक्ष श्री मुकेश जैन के नेतृत्व मे हिन्दू संगठनो ने जन्तर मन्तर पर अन्ना हजारे के विरोध में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कारी नारे लगा रहे थे- दारा सेना – जिन्दाबाद, शातिर अन्ना हजारे -मुर्दाबाद, आतंकवादी अमेरीकी मिश्निरी की चण्डाल चैकड़ी का सरगना-शातिर अन्ना हजारे मुर्दाबाद, अन्ना का कमाण्डर उल्फा का ईसाई आतंकवादी अखिल गोगई – मुर्दाबाद, नक्सली आतंकवादी अग्निवेश -मुर्दाबाद। धर्मरक्षक श्री दारा सेना के साथ अखिल भारत हिन्दू महासभा,,बिहारी भाई सुरक्षा समिति ,खटिक चर्मकार बाल्मिकी धर्मरक्षक सेना, बाबा अमरनाथ तीर्थ यात्री महासंघ, पूर्वोत्तर शहीद सैनिक परिजन संघ, संविधान रक्षक साधू समाज आदि हिन्दू संगठनो ने जन्तर मन्तर पर अन्ना हजारे के विरोध में प्रदर्शन किया । इस अवसर पर प्रदर्शन कारियों को संबोधित करते हुए दारा सेना के अध्यक्ष श्री मुकेश जैन ने कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी और प्रधान मंत्री श्री मनमोहन सिंह की अन्ना मामले में अमेरीकी ताकतों द्वारा देश को अस्थिर करने की साजिश को सही बताया। श्री मुकेश जैन ने कहा कि कुछ ही साल पहले अमेरीका ने कैसे रासायनिक हथियारों का झूठा मामला खड़ा करके भारत के नजदीकी और मित्र देश इराक को नेस्तनाबूत करके गुलाम बना लिया। और आज अमेरीका अफगानिस्तान पर कब्जा करके हमारे सिर पर बैठ गया है। श्री मुकेश जैन ने देश वासियों को अन्ना की देश को अस्थिर करने की साजिश से सावधान रहने की अपील करते हुए कहा कि कल देश अमेरीका का गुलाम होता है तो जयचन्द और मीरजाफर की लिस्ट में एक और नाम होगा शातिर अन्ना हजारे। श्री मुकेश जैन ने भाजपा नेता एम वेंकैया नायडू की आलोचना करते हुए कहा कि शातिर अन्ना के साथ जुड़े अग्निवेश,पी वी राजगोपाल और अखिल गोगई जैसे देश के दुश्मन आतंकवादी शायद भाजपा नेता वेंकैया नायडू जानबूझ कर नहीं देख रहे हैं। उन्हें मालूम होना चाहिये कि अग्निवेश को उन्हीं की छत्तीसगढ़ सरकार ने कट्टर नक्सली आतंकवादी सबूतों के साथ बताया।अखिल गोगई के बारे में असम सरकार के मुख्य मंत्री तरूण गोगई का कहना है कि यह उल्फा का कट्टर आतंकवादी हैं। मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह के अनुसार पी वी राजगोपाल नक्सली आतंकवादी है।इस नक्सली ईसाई आतंकवादी की पत्नि कनाड़ा की ईसाई है। पति पत्नि दोनों को आतंकवादी अंगेज मिश्निरियों का आर्शीवाद प्राप्त है।नक्सली इसाई आतंकवादी पी वी राजगोपाल अपने 25000 नक्सली ईसाई आतंकवादियों को लेकर 4 साल पहले दिल्ली में आने की रिहर्सल भी कर चुका है। इन आतंकवादी गिरोहों को अन्तरराष्ट्रीय और अमेरीकी चर्च मदद करते हैं ये भी भारत सरकार ने 10 दिसम्बर 96 और 5 मई 1954 को संसद के बताया था। इस अवसर पर बिहारी भाई सुरक्षा समिति की अघ्यक्षा श्रीमति रेणु गुप्ता ने कहा कि बिहारियों को असम में जान से मारने वाले उल्फा के ईसाई आतंकवादी अखिल गोगई के समर्थक अन्ना हजारे का सभी बिहारी भाई विरोध करें।

mukeshjain dara sena के द्वारा
July 28, 2011

धर्मरक्षक श्री दारा सेना 77 खेड़ाखूर्द, दिल्ली -110082 दूरभाष .9212023514 प्रेस विज्ञप्ति 27-7-11 रोमन कैथेलिक चर्च के इसाई आतंकवाद के खिलाफ याचिका सर्वोच्च न्यायालय में लगायी अखिल भारत हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री चन्द्रप्रकाश कौशिक के नेतृत्व में धर्मरक्षक श्री दारा सेना,के अध्यक्ष श्री मुकेश जैन ने इसाई आतंकवाद पूर्वोत्तर शहीद सैनिक परिजन संघ,,खटिक चर्मकार बाल्मिकी धर्मरक्षक सेना,,हिन्दू पत्रकार व बुद्धिजीवी मच के नेताओं के साथ मिलकर सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश महोदय को जन हित याचिका के रूप में प्रार्थना पत्र दिया। और चर्च के पूर्वोत्तर के इसाई आतंकवाद और नक्सली माओवादी कहे जा रहे ईसाई आतंकवाद की पोल खोलते हुए उसके विनाश की मांग की। सर्वोच्च न्यायालय में दायर की गयी इस याचिका में बताया गया है कि पूर्वोत्तर के ईसाई आतंकवादी गिरोहों ने वहां के हिन्दुओं का जीना मुश्किल कर रखा हैं ा न्यायालय रोमन कैथोलिक चर्च के इसाई आतंवादियों द्वारा की जा रही लाखों सैनिको व नागरिकों की निर्मम हत्याओं पर और इसाईयत न अपनाने पर जान से मारना और इसाईयत न अपनाने पर बलात्कार करना व डायन बताकर जान से मारने पर स्वयं सज्ञान लेकर देशधर्म की रक्षा करे। याचिका कत्र्ताओं ने रोमन कैथोलिक चर्च द्वारा अरूणाचल प्रदेश में वहां के जनजातिय हिन्दुओं को ए के 47 के बल पर जबरदस्ती इसाई बनाने और इसाई न बनने पर जिन्दा जलानें ,मदिर व मठों को तोड़ने और मुख्यमंत्री जी तक का अपहरण करने व उनके परिवार को जान से मारने तक का ब्योरा सबूतों के साथ दिया है। याचिका कत्र्ताओं ने याचिका में लिखा कि रोमन कैथोलिक चर्च के मंसूबे भारत के नागरिकों व सैनिको की लाशो के ढेर लगाकर उनका पूरा सफाया करना और भारत की संप्रभुता को टुकड़े टुकड़े कर के एक अलग ईसाई देश बनाने के है।इसी माह की 9 तारीख में 20 लाख सूडानी मुस्लिमों की लाश पर बने दक्षिण सूडान नामक ईसाई देश से हमें सबक लेकर भारत की संप्रभुता को बचाने और और भारत की महान संस्कृति को बचाने और उसके नागरिकों की जान की रक्षा करने के लिये कदम उठाने चाहिये। विदेशो से आ रहे खरबों डालर का इस्तेमाल हिन्दुओं का धर्म भ्रष्ट करके उन्हें इसाई आतंकवादी बनाकर भारत सरकार से युद्ध करने और हजारों सैनिकों को मारने में होने का उल्लेख भी याचिका में किया गया है। 18 अप्रैल 2000 को बैपटिस्ट चर्च के एक पादरी व उसके 2 इसाई आतंकवादियों से 50 किलो आर डी एक्स गोला बारूद भी त्रिपुरा सरकार ने बरामद करके गिरफ्तार किया इसके सबूत भी याचिका में दिये गये हैं। याचिका में मांग की गयी है कि सर्वोच्च न्यायालय सरकार को आदेश दे कि सरकार जनवरी महा मेें मेघालय में इसाईयों द्वारा ध्वस्त किये गये हिन्दू मन्दिरों का पुनः निर्माण करवाये और हिन्दुओं के जलाये गये सभी घरों को तुरन्त बनवाये। इसी के साथ इसाईयों द्वारा मारे गये 30 हिन्दुओं के परिवारों को बीस.बीस लाख रूपये मुआवजे के दिलवाये। और बैपटिस्ट चर्च को आतंकवादी संगठन करार दे। याचिका में मांग है कि सर्वोच्च न्यायालय सरकार को आदेश दे कि सरकार पूर्वोत्तर के इसाई आतंकवादियों व अन्य राज्यों के नक्सली ईसाई आतंकवादियों से बात.चीत का रास्ता अख्तयार करना छोड़कर इन इसाई आतंकवादियों को बमों और गोलियों से भूनकर रख दे। और इनके सभी आतंकवादी अड्डे जिन्हें इन्होंने चर्च अनाथालय अस्पताल इसाई स्कूल का छदम् रूप देकर अपनी पनाहस्थली बना रखा है उन्हें भी नष्ट करें। जैसे कि श्रीलंका सरकार ने लिठ्ठे प्रमुख प्रभाकरण नामक इसाई आतंकवादी का विनाश किया था। प्रेस सचिव

DHEERAJ PAWAR के द्वारा
July 25, 2011

सुरेश जी इनका एक ही इलाज है……जूते मरो सालो को……

shiromanisampoorna के द्वारा
April 25, 2011

आदरणीय सुरेशजी, सादर वंदन/ इतनी बेवाक, स्पष्ट और अन्वेषणपूर्ण विश्लेश्र्ण के लिए बहुत बहुत बधाई……………………….देश के लिए आपकी व्यथा अनुभूत हो रही है कोटि-कोटि वंदन

ashvinikumar के द्वारा
April 25, 2011

स्नेही अग्रज सादर अभिवादन ज्वलंत विषयों पर आपके लेख का तो मे सदा प्रशंशक रहा हूँ यहाँ पहली बार आपको पढ़ने का मौक़ा मिला जिसके लिए आपका आभारी हूँ ,,साथ ही एक शिकायत भी है ,,ब्लॉग सपाट का एक संक्रमण यहाँ भी भी उठा ले आये ,,(जो हर जगह टांग उठा रहा है ) ……….जय भारत

ashvinikumar के द्वारा
April 25, 2011

स्नेही अग्रज सादर अभिवादन ज्वलंत विषयों पर आपके लेख का तो मे सदा प्रशंशक रहा हूँ यहाँ पहली बार आपको पढ़ने का मौक़ा मिला जिसके लिए आपका आभारी हूँ ,,साथ ही एक शिकायत भी है ,,ब्लॉग सपाट का एक संक्रमण यहाँ भी भी उठा ले आये ,,(जो हर टांग उठा रहा है ) ……….जय भारत


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